शुक्रवार, 10 जून 2016

प्राचीन नाम

क्या आप जानते हैं कि हमारे देश, गाँव व शहरों के असली नाम क्या थे ?

१. हिन्दुस्तान, इंडिया या भारत का असली नाम - आर्यावर्त्त !
२. कानपुर का असली नाम - कान्हापुर !
३. दिल्ली का असली नाम - इन्द्रप्रस्थ !
४. हैदराबाद का असली नाम - भाग्यनगर !
५. इलाहाबाद का असली नाम - प्रयाग !
६. औरंगाबाद का असली नाम - संभाजी नगर !
७. भोपाल का असली नाम - भोजपाल !
८. लखनऊ का असली नाम - लक्ष्मणपुरी !
९. अहमदाबाद का असली नाम -  कर्णावती !
१०. फैजाबाद का असली नाम - अवध !
११. अलीगढ़ का असली नाम - हरिगढ़ !
१२. मिराज का असली नाम - शिव प्रदेश !
१३. मुजफ्फरनगर का असली नाम - लक्ष्मी नगर !
१४. शामली का असली नाम - श्यामली !
१५. रोहतक का असली नाम - रोहितासपुर !
१६. पोरबंदर का असली नाम - सुदामापुरी !
१७. पटना का असली नाम - पाटलीपुत्र !
१८. नांदेड का असली नाम - नंदीग्राम !
१९. आजमगढ का असली नाम - आर्यगढ़ !
२०. अजमेर का असली नाम - अजयमेरु !
२१. उज्जैन का असली नाम - अवंतिका !
२२. जमशेदपुर का असली नाम काली माटी !
२३. विशाखापट्टनम का असली नाम - विजात्रापश्म !
२४. गुवाहटी का असली नाम - गौहाटी !
२५. सुल्तानगँज का असली नाम - चम्पानगरी !
२६. बुरहानपुर का असली नाम -  ब्रह्मपुर !
२७. इंदौर का असली नाम - इंदुर !
२८. नशरुलागंज का असली नाम - भीरुंदा !
२९. सोनीपत का असली नाम - स्वर्णप्रस्थ !
३०. पानीपत का असली नाम - पर्णप्रस्थ !
३१.बागपत का असली नाम - बागप्रस्थ !
३२. उसामानाबाद का असली नाम - धाराशिव (महाराष्ट्र में) !
३३. देवरिया का असली नाम - देवपुरी ! (उत्तर प्रदेश में)
३४. सुल्तानपुर का असली नाम - कुशभवनपुर
३५. लखीमपुर का असली नाम - लक्ष्मीपुर ! (उत्तर प्रदेश में)

ये सभी नाम मुगलों, अंग्रेजों,  ने बदले हैं ।

बुधवार, 8 जून 2016

भक्ति का प्रवेश

कोई-कोई  मैसेज  वाकई  कमाल होता
है आप स्वयं पढ़िये....
        
कितना सत्य है ना.....?
����भक्ति जब भोजन में प्रवेश करती है,
भोजन " प्रसाद "बन जाता है.।
             ����
भक्ति जब भूख में प्रवेश करती है,
भूख " व्रत " बन  जाती है.।
          ����
भक्ति जब पानी में प्रवेश करती है,
पानी " चरणामृत " बन जाता है.।
           ����
भक्ति जब सफर में प्रवेश करती है,
सफर " तीर्थयात्रा " बन जाता है.।
            ����
भक्ति जब संगीत में प्रवेश करती है,
संगीत " कीर्तन " बन जाता है.।
            ����
भक्ति जब घर में प्रवेश करती है,
घर " मन्दिर " बन जाता है.।
            ����
भक्ति जब कार्य में प्रवेश करती है,
कार्य " कर्म " बन जाता है.।
           ����
भक्ति जब क्रिया में प्रवेश करती है,
क्रिया "सेवा " बन जाती है.। और...
           ����
भक्ति जब व्यक्ति में प्रवेश करती है,
व्यक्ति " मानव " बन जाता है..।
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शिवलिंग पर पाप लगता है इन चीजों को चढ़ाने से::

शिवलिंग पर पाप लगता है इन चीजों को चढ़ाने से::
शिव महापुराण के अनुसार शिव एकमात्र ऐसे स्वरुप हैं जो दैवीय शक्ति हैं अर्थात जो निष्कल व सकल दोनों हैं। यही कारण है कि एकमात्र शिव का पूजन लिंग व मूर्ति दोनों रूपों में किया जाता है।सनातन धर्म में देवों के देव महादेव पुकारे जाने वाले शिव मूर्त या सगुण और अमूर्त या निर्गुण रूप में पूजे जाते हैं अर्थात शिव ऐसी दैवीय शक्ति हैं, जिनका पूजन साकार और निराकार दोनों ही रूप में किया जाता है।शिव ही एक मात्र अजन्मा, अनादि, अनंत है अर्थात उनका कोई आरंभ है न अंत है। न उनका जन्म हुआ है, न वह मृत्यु को प्राप्त होते हैं। इस तरह शिव कोई अवतार न होकर साक्षात परमेश्वर माने जाते हैं।

शिवलिंग पर इन चीजों को चढ़ाने से पुण्य नहीं बल्कि लगता है पाप::

भगवान शिव को तुलसी अर्पित न करें क्योंकि पुराणों में तुलसी को साक्षात लक्ष्मी माना गया है। देवी लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी हैं इसलिए भगवान विष्णु और उनके अवतारों के अतिरिक्त ये अन्य किसी देवी-देवता को नहीं चढ़ाई जाती।* शिवलिंग पर कभी भी कुमकुम, केतकी के फूल, हल्दी और नारियल पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। इन चीजों को चढ़ाने से पुण्य नहीं बल्कि लगता है पाप।* घर में कभी भी दो शिवलिंग, दो गणेश स्वरूप, तीन दुर्गा मां की प्रतिमा एक साथ न रखें। इससे घर में अभाग्य आताहै।

शिव पूजन में बिल्वपत्र का प्रथम एवं विशेष स्थान है। शिवलिंग पर बेल पत्र अर्पित करते समय ध्यान रखें की वो कटे-फटे और कीड़ों के खाए न हों।
शिवलिंग पर चढ़े बिल्व पत्र को पुन: भगवान शिव पर अर्पित किया जा सकता है लेकिन जल से धोकर अर्पण करना चाहिए। संभव हो तो गंगा जल से धोएं।

शिवलिंग पर दूध, दही तथा पंचामृत चढ़ाते समय कभी भी कांसे के बर्तन प्रयोग में नहीं लाएं।
धतूरा और विजया (भांग) एकसाथ ही अर्पण करने चाहिए।

शिव पुराण में कहा गया है कि शिवलिंग की परिक्रमा के दौरान आधी परिक्रमा करें फिर वापस लौट कर दूसरी परिक्रमा करें। चारों ओर घूमकर परिक्रमा करने से दोष लगता है।

हर हर महादेव, जय महाकाल

धरती पर भगवान हैं" सिद्ध करके दिखाता हूँ :

आइये आज आपको "धरती पर भगवान हैं" सिद्ध करके दिखाता हूँ :

१. "अमरनाथजी" में शिवलिंग अपने आप बनता है

२. "माँ ज्वालामुखी" में हमेशा ज्वाला निकलती है l

३. "मैहर माता मंदिर" में रात को आल्हा अब भी आते हैं l

४. सीमा पर स्थित तनोट माता मंदिर में 3000 बम में से एक का ना फूटना l

५. इतने बड़े हादसे के बाद भी "केदारनाथ मंदिर" का बाल ना बांका होना l

६. पूरी दुनियां में आज भी सिर्फ "रामसेतु के पत्थर" पानी में तैरते हैं l

७. "रामेश्वरम धाम" में सागर का कभी उफान न मारना l

८. "पुरी के मंदिर" के ऊपर से किसी पक्षी या विमान का न निकलना l

९. "पुरी मंदिर" की पताका हमेशा हवा के विपरीत दिशा में उड़ना l

१०. उज्जैन में "भैरोंनाथ" का मदिरा पीना l

११. गंगा और नर्मदा नदी के पानी का कभी खराब न होना l

१२. श्री राम नाम धन संग्रह बॆंक में संग्रहीत इकतालीस अरब राम नाम मंत्र पूरित ग्रंथों को (कागज होने पर भी) चूहों द्वारा नहीं काटा जाना। जबकि अनेक चूहे अंदर घुमते रहते है।

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