*छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया*
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शायद भारत में पहला राज्य, जहाँ के लोग अपने प्रांत को भी माँ कहते हैं..
"छत्तीसगढ़ महतारी"
प्रभु श्रीराम का *मामा* घर है
छत्तीसगढ़ को दक्षिण कोशल कहा जाता है.. और माँ कौशिल्या यहीं महाराज भानुमंत के घर आरंग में पैदा हुई थीं,
अनोखी परम्परा आज भी..
चुंकि रामजी हमारे *भांजा* हैं, और भगवान भी हैं. उनका पैर छुते हैं. इसलिए छत्तीसगढ़ में हर भांजा को राम और भांजियों को सीता मानकर सभी मामा उनका पैर छुते हैं..
उम्र में चाहे कितने ही छोटे हों भांजा.. यह परंपरा छ.ग. में पुर्ण रुप से हर परिवार आजभी निभा रहा है. यह परंपरा भारत में केवल छग में ही मानी जाती है अन्य राज्यो में नहीं..
शबरी के राम
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राम जी ने शबरी के जुठे बेर यंही छत्तीसगढ़ में खाये.. सबरीनारायण (शिवरीनारायण) नामक जगह पर..
एक लाख छिद्र युक्त लक्ष्मणेश्वर महादेव.. लखनलाल द्वारा स्थापित है..
खरौद नगर खर-दुषन की राजधानी जहाँ राम ने उनका उध्दार किये
नवधा गान कीर्तन शबरी ने राम से पाया.. इसलिए छत्तीसगढ़ के हर गाँव में नवधा गान होता है..
यहीं बस्तर में दंडकारण्य में राम जी ने बहुत समय गुजारा,.
वाल्मिकी जी का आश्रम तुरतुरिया नामक जगह पर ही.. माँ सीतानें *लव-कुश* को जन्म दिया..
अनेक मंदिरों की ह्दय स्थली छत्तीसगढ़ में
चार दिशा की चार देवियाँ
चन्द्रपुर की चन्द्रहासिनी माँ पुर्व में,
रतनपुर की महामाया माँ उत्तर में,
डोंगरगढ़ की बम्लेश्वरी माँ पश्चिम में,
दंतेवाड़ा की दंतेश्वरी माँ दक्षिण में,
बस्तर का दशहरा विश्व प्रसिध्द सबसे अधिक दिनों तक चलता है..
भोले भाले लोगों का गढ़ ३६गढ़..
धान को सोना मानते हैं लोग.
हमारी महतारी छत्तीसगढ़ दाई भी..
1 धान के दाने को हजार जो कर देती हैं.
56 भोग से भी नहीं भरता छत्तीसगढ़ियों का पेट..
जब तक चावल से बने 1 मुट्ठी बासी या भात नहीं खा लेते..
हर त्यौहार धान की फसल पर आधारित होती है.
छेरछेरा, हरियाली, तीजा, पोरा, कमरछट, बइलाभात आदि..
हर नृत्य हर गान.. जैसे सुआ, करमा, ददरिया, पंडवानी, पंथी(सबसे तेज नृत्य), भरथरी, भोजली, जसगीत, आदि आदि मनभावन हैं..
यहाँ के पकवान.. जैसे चीला, चौसेला, बरा, सोंहारी, खुरमी, ठेठरी, बोबरा, देरोरही, अईसा, आदि आदि लाजवाब हैं..
अरपा, पैरी, हंसदेव, सोंढुर, शबरी, शिवनाथ, इंद्रावती, मांड, बोराई, रिहन्द, सोन, केलो, खारुन, महानदी आदि विशाल नदियाँ
माँ छत्तीसगढ़ का यशोगान करती हैं..
खनिजों से भरीपुरी माँ छत्तीसगढ़ की गोदी..
वीर स्वतंत्रता सेनानीयों सुंदर लाल, वीर नारायण, वीर गुंडाधुर की यह पवित्र भुमि
❤जोहार हो जोहार
छत्तीसगढ़ महतारी!!
तोर पइंया हमन पखारी..
"जोहार भारत माँ..
जोहार छत्तीसगढ़ महतारी..
जब हम अपने जन्मस्थली प्रदेश को महतारी का सम्बोधन देते हैं
तो अपने देश के लिए " भारत माता " का ऊद्बोधन कर हम मातृभूमि के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हैं ।
"जय छत्तीसगढ़ महतारी"
"भारत माता की जय ।"
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