सोमवार, 17 अक्टूबर 2016

पंचामृत

                      पंचामृत
परम् पूजनीय संत श्री आसाराम बापू के सानिध्य मे दिनांक 27/07/2011के पावन बेला मे मैंने गुरुदेव से सरास्वत्य मंत्र की दीक्षा ली ! !
        हरि ॐ पंचांग अनुसार तिथि
               तिथि - द्वादशी
               पक्ष   - कृष्ण
               नक्षत्र - रोहिणी
               वार    - बुधवार
               रितु    - ग्रीस्म
              आयन - दक्षिणायन

1.  सन्यासी क्या हैं  !
सन्यासी केवल ओ नही हैं जो अपने घर वार परिवार को छोड़कर दुर जंगल मे जाकर जप - तप करते हैं , सन्यासी ओ हैं जो घर मे ही रहकर नित्य कर्म करते हुये माँ बाप की सेवा करते हुये ईश्वर का जप करता हैं वही पूर्ण सन्यासी हैं !

2. ध्यान क्या हैं !
ध्यान केवल ईश्वर के समक्ष बैठकर जप या ध्यान करना नही हैं , ध्यान तो जो कार्य हम कर रहे हैं  वह पूर्ण रुप से ख़त्म न हो जाये तब तक करना चाहिये वही पूर्ण ध्यान हैं

3. ज्ञान क्या हैं !
ज्ञान तो प्रकाश की तरह हैं जितना फैलाते जायेंगे उतना ही फैलता जाता हैं , गुरु के द्वारा मिले हुये ज्ञान को जनकल्याण के लिये उस ज्ञान का सही उपयोग व उस ज्ञान को विस्तृत करना ही ज्ञान हैं !

4.  सृष्टि क्या हैं !
नारी तत्व ही सम्पूर्ण सृष्टि हैं , इसका आरंभ और अंत नारी ही हैं सृष्टि का समस्त तेज नारी ऊपर समाया हुआ हैं , गीता मे कहाँ गया हैं की " यत्र् नारी पुज्यन्ते तत्र्  देवता रम्न्ते" जहाँ नारी की पूजा होती हैं वहाँ देवता निवास करते हैं ,
इस सृष्टि को जन्म देने वाली भी नारी हैं , नारी तत्व ही मनुष्य को पुरुषार्थ बनाता हैं माता दुर्गा के कारण ही इस  सृष्टि की रचना हुई और अंत मे वही तत्व ही बच जायेंगी !

5.  देवी देवताओं के रुप : -
  दुर्गा माँ   -  श्रद्धा
  शंकर      -  विश्वास
  गणेश      -   विवेक
  विष्णु       -   व्यापक
  सूर्य          -   ज्ञान

6. गुणों के प्रकार : -
   सतोगुण   -    माँ दुर्गा
   रजोगुण    -    मनुष्य
   तमोगुण    -    राक्षस

7. काण्ड के प्रकार : -
      कर्मकाण्ड
      बुद्धिकाण्ड
      भक्तिकाण्ड

8.  मंत्र की महिमा : -
जो मनुष्य गुरु से दीक्षा लेकर उस मंत्र का जाप नही करता वह मनुष्य न चाहते हुये भी अपने गुरू से बहिस्कृत हो जाता हैं !

9.  नर्क से आये हुये के लक्षण : -
१. क्रोधी होगा
२. गुस्सा हमेशा नाक पर रहता हैं
३. हमेशा दुखी रहता हैं
४. लड़ाई - झगडा करता हैं
५. गंदे लोगो के साथ रहता हैं
६. भजन नही करता
७. बुरे लोगो की सेवा करता हैं

***** नर्क मे कौन जाता हैं*****
1. सौ बार जो बरात जाता हैं वह नर्क मे जाता हैं उदा. श्रृंगार करता हैं , लड़ाई झगडा , शराब पिता हैं
2. बुरे काम करने वाला
3. पूजा पाठ न करने वाला
4. खराब विचार रखने वाला
5. व्यसन माँस भक्षण करने वाला

10. स्वर्ग से आये हुये के लक्षण : -
१. दान देता हैं
२. मधुर वाणी बोलता हैं
३. अपने को गरीब मानता हैं
४. पूजा - पाठ मे रुचि रखता हैं
५. ब्राम्हणों का सम्मान करता हैं
६. बडों का आदर करता हैं

**** स्वर्ग कौन जाता हैं *****
1. सौ बार जो शमशान जाता हैं वह स्वर्ग जाता हैं उदा. न कोई  श्रृंगार करके जाते हैं और न ही लड़ाई झगड़ा !

11. माला जप क्या हैं : -
माला जप रुद्राक्ष की माला लेकर ईश्वर के सामने घंटों भर जप करते रहना नही हैं , कबीर जी ने कहाँ हैं की माला फेरत जुग बीत गया मिला न मनका फेर इसलिए जप मन से होनी चाहिये , मानसिक जप ही सर्वश्रेठ जप हैं !

12.  भगवान कहाँ हैं : -
गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामायण मे कहाँ हैं की   "हरि व्यापक सर्वत्र समाना , प्रेम से प्रगटे यही मैं जाना "
कबीर जी ने कहाँ हैं की - न मै जप मे न मै तप मे न व्रत उपवास मे मुझे कहाँ तू ढ़ूंढ़ रहा बन्दे मै तो तेरे पास मे , 

13.  84  लाख योनिया : -
   पेड़  पौधे       -   30 लाख
   कीड़े मकोड़े   -   27 लाख
              पक्षी    -  14  लाख
    पानी के जीव  -    9  लाख
देवता मनुष्य पशु  -   4  लाख

14. भक्ति क्या हैं : -
श्रद्धा और प्रेम का नाम ही भक्ति हैं ,  कई
लोग ऐसे होते हैं की जब तक भगवान उनकी हर मुरादे पूरी करता हैं तब तक वह खूब पूजा पाठ करेंगे जिस दिन उनकी मुरादे पूरी नही होगी उसी दिन से पूजा - पाठ बंद क्या इसे हम भक्ति कहेंगे , भक्ति तो ओ हैं की भगवान हमे चाहे सुख मे रखे चाहे  दुख मे मै तुम्हे भजता रहूँ इसी का नाम भक्ति हैं ! भक्ति गूंगे के गुण खाने के समान हैं अर्थात यदि गूँगा व्यक्ति अगर गुण खा ले तो वह उसका स्वाद नही बता सकता यही भक्ति हैं ! वृंदावन -  जहाँ पर भक्ति युवा अवस्था मे मिले वह वृंदावन हैं !
हो सकता है उसने कभी किसी की कोई पूजा न की हो लेकिन फिर भी वह भक्त है। हो सकता है वह उस अवस्था तक ध्यान, प्रेम या पूजा के जरिये पहुंचा हो, लेकिन अगर वह हरदम लगा हुआ है तो वह भक्त है।

भक्ति का अर्थ मंदिर जा कर राम-राम कहना नहीं है। वो इन्सान जो अपने एकमात्र लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित है, वह जो भी काम कर रहा है उसमें वह पूरी तरह से समर्पित है, वही सच्चा भक्त है।

15.  सत्य क्या हैं : -
सत्य केवल ईश्वर हैं वही इस सृष्टि के पहले , सृष्टि के मध्य मे , और सृष्टि के अंत मे विद्यमान हैं बाकी सब जो दिखता हैं वह झुठ हैं !

16.  झुठ  क्या  हैं : -
ये समस्त संसार , समस्त जीव , आकाश , पताल , चाँद , सूरज , आप मै ये सब झुठ
हैं क्यों की जो दिखाई देता हैं ओ सब झुठ हैं क्यों की एक प्रलय के बाद इनका नाश होना निश्चय हैं , हवा दिखती नही पर वह हैं उसी प्रकार ईश्वर भी सब जगह व्याप्त हैं लेकिन दिखाई नही देते !

17.  लक्ष्मी माँ के पुत्र : -
     धर्म - - -  धर्म से अर्थात कर्म करके मेहनत से कमाया हुआ पैसा अच्छे कामों मे  पूजा पाठ मे लगे पैसा धर्म हैं 
  
अग्नि  - - - जल्दी खर्च होगा इधर उधर फिजूल खर्च करना

     जल - - -  बह जायेंगा

     चोर - - -  चोरी करके कमाया हुआ  पैसा चुरा लेगा कोई

18.  नारी के स्वभाव : -
    दिति     -    काटने वाली ( कैंची )
   अदिति   -    जोड़ने वाली ( सुई )

19.  जीव - आत्मा का रंग : -
भारतीय योगी इसका रंग सुभ्र ज्योति स्वरूपा सफेद मानते हैं

20.आत्मा शरीर से बाहर कहाँ से निकलती हैं : -
आत्मा शरीर से बाहर मुख , नाक , कान , आँख , उत्सर्जन अंग से बाहर निकलती हैं दुष्ट वृत्ति के लोगो के प्राण मल मूत्र , योनि , और सत्कर्म मे रत आत्मा ब्रम्ह रंध्र से प्राण त्याग करते हैं !

21. पूजा क्या होती हैं : -
देवी देवताओं के कर्म को अपने जीवन मे उतारना ही सच्ची पूजा होती हैं

22. मन क्या हैं : -
सोचने की क्रिया ही मन हैं

23. आत्मा की शक्ति : -
मन      -    सोचेंगा
बुद्धि    -     निर्णय लेगा
विचार  -     विचार करेंगा

24. विचार के प्रकार : -
1.  उत्तम विचार
2.  कर्मता विचार
3.   नकारात्मक विचार
4.    व्यर्थ विचार

25.  भक्ति के प्रकार : -
1. सकाम भक्ति - वह भक्ति जो कुछ माँगने के उद्देश्य से किया जाये !
2. नि:स्काम भक्ति - वह भक्ति जो केवल प्रभु से प्रेम करना भक्ति करना ईश्वर से कूछ भी अभिलाषा न रखना केवल भक्ति करना

26. पुष्पों को अनावश्यक नही तोड़ना चाहिये , यह पाप हैं , वृक्ष भी भगवान होते हैं

27. शैली ( भाषा ) के प्रकार : -
समास शैली - वाक्य को संक्षेप मे कहना

व्यास शैली  -  वाक्य को विस्तृत से कहना

28.  सबसे बड़ा कौन हैं : -
देवताओं के पास दमन नही हैं , मनुष्यों के पास दान करना सीख रहे हैं , राक्षसों के पास दया नही हैं !

29.  युगों के चरण : -
1.  सतयुग - १. तप
                    २. पवित्रता
                    ३. दया
                     ४. दान ( सत्य )
तपस्या से भगवान प्रसन्न होते थे

2. त्रेतायुग - १. पवित्रता
                    २. दया
                    ३. दान ( सत्य )
पवित्र मन से भगवान प्रसन्न होते थे

3. द्वापरयुग - १. दया
                      २. दान ( सत्य )
दया की भावना से भगवान प्रसन्न होते थे

4.  कलयुग - १. दान ( सत्य )
दान करके भगवान को प्रसन्न किया जा सकता हैं

30. GOD का पूरा नाम : -
      G - genrater ( उत्पादक )
      O - oprater ( संचालक )
      D - distroyer ( संहारक )
go on dueity

31. वस्तु मे स्वाद नही होता , स्वाद तो भूख मे होता हैं

32. प्राचीन काल मे भारत का नाम अजनाभ था , और कई नाम हुये राजा भरत के नाम पर भारत एवं इंदिया हिन्दी शब्द से इंडिया बना !

33. राजा परीक्षित कौन थे जिन्होने अमृत को ठुकराकर श्रीमद्भागवत की कथा सुकदेव जी से  सुने एवं संसार को सुनाया
          राजा परीक्षित पांडवों की पत्नि माता द्रोपदी की बहू उत्तरा माता के पुत्र थे अर्थात अभिमन्यु के पुत्र राजा परीक्षित थे भगवान श्री कृष्ण ने अस्वस्थमा के छोड़े गये अस्त्र से उत्तरा के गर्भ मे जाकर राजा परीक्षित की रक्षा की थी !

34. हमारी शक्तियां : -
इंद्रियां        -    5
कर्म इंद्रियां -  11
ज्ञान इंद्रियां -  आँख, कान , मुँह , नाक , त्वचा

35. इनके नाम नहीँ लेना चाहिये : -
1. अपना नाम
2. ज्येष्ठ पुत्र
3. दुश्मन
4. पति - पत्नि
5. गुरू का
6. बड़ों का

36. मानसिक जप की महिमा : -
सुख और दुख को हमे हमेशा छुपाना चाहिये , एक व्यक्ति मानसिक जप करता था पूजा पाठ कूछ नहीँ करता था लेकिन उसकी पत्नि बहुत व्रत पूजा पाठ किया करती थी वह सोचती थी की मेरा पति कितना निकम्मा हैं भगवान का नाम तक नहीँ लेता लेकिन बंधुओ एक दिन सोते समय निद्रा मे राम राम नाम की आवज़ उसके मुख से निकल गया उसकी पत्नि ने वह सुन लिया सुबह उठी तो बोली की कम से कम आपने निद्रा मे ही सही भगवान का नाम तो लिया , उसकी पति ने यह सुनकर चौक गया और बोला अरे पगली जिस खजाना को मै वर्षों से सब से छिपा रहा था वह लूट गया , वह प्रगट हो गया अब मेरा क्या होगा मेरा खजाना चोरी हो गया , ये सुनकर पत्नि बोली की हे प्राण नाथ मै आपको निकम्मा समझती थी लेकिन आप अमूल खजाना के धनी निकले !

37. विद्या जहर हैं , लेकिन उसका फल अमृत हैं !

38. प्याला के प्रकार : -
१. सोमरस - देवता पीते हैं
२. सत्संग  -  मनुष्यों के लिये
३. शराब   -  राक्षसों के लिये

39. वश मे करने के तरीके : -
1. मीठे वचन
2. मंत्र ( वशीकरण )
3. सम्मोहन ( आँखो से आँख मिलाकर )

40. मृत्यू  के समय हम जिस जीव का हम ध्यान करते हैं , उसी रूप मे हमारा जन्म होता हैं , " कर्मणाये जयंती जन्तु " कर्म के अनुसार मनुष्य जन्म लेता हैं कही अमीर घर तो गरीब घर !

41. कलयुग मे दो देवताओं की अधिक पूजा होगी : -
कलव चंडी विनायकी
1. दुर्गा माँ
2. गणेश

42. पुत्र कौन हैं : -
जो अपने पुण्यों से अपने पूर्वजों का उद्धार करे वह पुत्र हैं

43. गोपी कौन हैं : -
जो छिपा कर रखे दुख सुख , दर्द आदि को वह गोपी हैं , एक व्यक्ति भी गोपी हो सकता हैं

44. पुण्य का क्या करे : -
मेरे द्वारा कमायें हुये पुण्य को , उसी को समर्पित करना , अभिमान ( घमंड ) का समन हो जाता हैं और भगवान अनंत गुना फल देता हैं , पुण्यों का दान करना भी एक प्रकार का पुण्य ही हैं

45. यह संसार भौंऊक व्यक्ति का नहीँ हैं , बुराई को उजाकर करना एवं अच्छाइयो को छिपाना सर्वश्रेष्ट धर्म हैं

46. नारी के श्रृंगार : -
1.  संयोग श्रृंगार- पति और पत्नि एक साथ गृहस्थ जीवन जी रहे हो ,
जैसे : - रुक्मिणी मैया और श्री कृष्ण जी

2. वियोग श्रृंगार- प्रेम की गहराई से होती हैं जब प्रीतम या प्रिय दुर हो , जैसे: - राधा रानी और श्री कृष्ण जी

47. कथा मे ऐसे लोग भी होते हैं , यहाँ आये तो वेलकम और गये तो भीड़ कम

48. रक्षासूत्र धागा पहनने के नियम : -
रक्षासूत्र अपने ऊँचाई के बराबर पहनना चाहिये , लड़के को दाहिने(जेवनि ) हाथो मे व लड़कियों को बायें (डेरी )हाथो मे पहनना चाहिये , रक्षासूत्र को नाड़ी नियंत्रक भी कहाँ जाता हैं

49. जिस तरह तू सोचता हैं उस तरह तू दिखता हैं , जिस तरह बोलता हैं उस तरह लिखता हैं

50. प्राचीन काल की कई विद्यायें आज शमशान मे जाकर विलुप्त हो गयी क्यों की जो कोई उस विद्या को जानता हैं वह किसी दूसरे को नहीँ बताता , वह विद्या मृत्यू के पश्चात शमशान मे चला जाता हैं , वह विद्या विलुप्त हो जाती हैं , उस विद्या को ऐसे व्यक्ति को सौं दे जो जीव का कल्याण कर सके !

51. पूजा के बाद श्रीमद्भागवत के इस श्लोक का पाठ करना चाहिये : -
11स्कंद 2 अध्याय 36 श्लोक

52. कथा को कौन सुनने आता हैं : -
तुलसीदास जी ने रामायण मे कहाँ हैं की - आवत अवसर अति कठिनाई , राम कृपा बिनु अवसर न आई ! !

53. गुरुओं के प्रकार : - श्रीमद्भागवत गीता मे 24 गुरू बताये गये हैं जो इस प्रकार हैं

1. दीक्षा देने वाला - मंत्र की दीक्षा देने वाला
2.  लघु(छोटा) - एक छोटा बालक भी गुरू हो सकता हैं
3. गुण  -  अच्छाई कही से भी मिल जाये , चाहे जीव जन्तु से या पेड़ पौधे से या दुश्मन से
4.  पृथ्वी  -  छमा का गुण ले
5.  वायु  -  अल्पाहार  ( कम खाना )
6.  कबूतर -  घर मे कलह एवं सुखों का ह्रान्स
7.  आकाश - व्यापकता का गुण
8.  अग्नि - तेजस्विता ( ऊपर उठने का )
9.  चंद्रमा - आत्मा का ह्रान्स व विकास नही होता
10.  सूर्य - सुख और दुख मे सम रहने का गुण जैसे : - सूर्य उदय एवं अस्त होने पर हमेसा लाल होता हैं
11.  अजगर साँप - संतोष का गुण ले जैसे : - तीन जगह संतोष करना
            1. भोजन
            2. पत्नि
            3. धन
और असंतोष करना चाहिये
            1. अध्ययन
            2. जप ( माला )
            3. दान देने मे

12. समुद्र -  मर्यादा का गुण ले
13.  पतंग -  संयम
14.  मधुमक्खी - संग्रह , जितना उपयुक्त          हो
15. हाथी - ऊँची सोच
16. हिरण - कान बड़ा होने के कारण तेज सुनता हैं
17. मछली - लालच न हो
18. पिंगला(वैश्या)- चिंतन अच्छा हो
कथा - एक वैश्या नदी किनारे बैठे हुये साधु को देख कर सोचती हैं की मेरे   जीवन से उस साधु का जीवन अच्छा हैं कियो की साधु रोज़ भजन कीर्तन करता हैं रोज़ नदी के किनारे ध्यान करता हैं लेकिन साधु सोचने लगा की मेरा जीवन से उस वैस्या की जीवन अच्छा हैं कियो की उसके दरबार मे कई राजा महाराजा आते हैं , सोना चाँदी लाते हैं , उसकी जिंदगी बेहतर हैं , लेकिन अंत मे मृत्यु के पश्चात वैश्या स्वर्ग मे और साधु नर्क मे  गया !
19. चील - उधार प्रेम की कैंची हैं
20. बालक - भोलापन के गुण
21. कुंवारी कन्या - एकांत निवास
22. साँप - साँप कभी घर नही बनाता
23. साधु - आश्रम नही बनाना, एक स्थान से दूसरे स्थान विचरण करते रहना 
24. मकड़ी - स्वयं घर बनाना

54. परिक्रमा विधि - परिक्रमा करते वक्त दाहिनी भुजा भगवान की तरफ़ रखनी चाहिये

55. श्री कृष्ण जी ने कलियाँ नाग को मारा नही कियो की कलियाँ नाग अहंकार का प्रतीक हैं , और अहंकार का त्याग किया जाता हैं मारा नही जाता एक और उदाहरण: -  श्याम जी ने इंद्र की पूजा बंद करवा दी

56. सेवक कैसे बनाये बच्चो को : - कथा सुनने आते हैं तो अपने पुत्र को साथ लेकर आवै जब वह अध्यात्म की सीढ़ी चडेगा तो संस्कार अपने आप आ जायेंगा और आप को बुढ़ापा मे रोना न पड़े आज कई पुत्र अपने माँ बाप को घर से निकाल दे रहे हैं

56. भगवान के साथ तीन चीज़े चली गयी 1. सत्य
2. धर्म
3. धैर्य

57. माया क्या हैं : -
जो हमे भ्रमित करता हैं वही माया हैं
माया के प्रकार : -
1. योग माया - यह जो माया हैं वह मनुष्यों को घेरता हैं और वह सोचता हैं की यह पुत्र मेरा हैं , यह पत्नी मेरी हैं बस मेरा मेरा करता रहता हैं
2. वैष्णवी माया - यह जो माया हैं भक्तो और संतों को घेरती हैं और वह सोचता हैं की मेरे प्रभु के शिवाय इस दुनियाँ मे कोई नही हैं

58. कलयुग का धर्म : -
1. विवाह का स्वरूप बदल जायेंगा , ॐनमो स्वाहा तेरा मेरा ब्याहा
2. स्नान ही सुधता का कारण बनेगी , लेकिन मन पवित्र नही होगा
3. दुर मे स्थित देवालय तीर्थ कहलायेगा
4. सुंदरता बालो मे चली जायेंगी
बालो को स्त्री को कटवाना शास्त्र विरुद्ध
हैं
5. अपने परिवार को पालन पोषण कर लिया तो अपने आप को प्रजापति दक्ष समझेगा
6. दान देने मे संकोच
7. कमजोर हो जायेंगा
8. पाखंडी का प्रचार , और संतों को पहचानना कठिन हो जायेंगा
9. कलयुग के राजा डाकू होंगे
10. सभी वर्ण जैसे : - ब्राम्हण , शूद्र , क्षत्रिय , वैश्य एक हो जायेंगे
11. पीठ पीछे बुराई और सामने मे खूब प्रशंसा करेंगे

59. चारो युग किसमें आयेंगा : - श्रीमद्भागवत मे चारो युग आते हैं क्यों की इसमे जप तप,  ध्यान,  साधना , यज्ञ , हरि कीर्तन सब कुछ होता हैं

60. कथा पवित्र करता हैं : -
1. श्रोता (सुनने वाला)
2. वक्ता (कहने वाला)
3. वाचक (बोलने वाला)

61. कथा का वास्तविक फल क्या हैं : -
कथा का वास्तविक फल ज्ञान की प्राप्ति करना नही हैं बल्कि प्रेम की प्राप्ति करना हैं

62. ईश्वर की कृपा से चार चीज़े मिलती हैं : -
1. मनुष्य जन्म
2. सत्संग
3. गुरू का सानिध्य
4. मोक्ष

63. संसार मे भले ही ये कपट चल सकता है , लेकिन भगवान के सामने कभी भी छल कपट नही चल सकता l उसके सामने जितना सहज बन सकते हो , जितना अज्ञानी बन सकते हो बन जाओ l देखिए भक्ति वक्ती सब कहते है , आज कितने लोग ऐसे है जब तक भगवान उनकी हर इच्छाओं को पूरी करता रहता है तब तक खूब पूजा पाठ आरती करेंगे , और जिस दिन भगवान ने इच्छा पूरी करनी बँद उसी दिन से आरती भी बँद , क्या आप को लगता है इसको भक्ति का नाम दे सकते है , नही , कभी नहीँ l भक्ति ओ है जो तू जैसा रखे , जहाँ रखे , जिस हाल मे रखे , मै तुझे भजता रहूँ l उससे कोई सिकायत नहीँ , कोई सिकवा नहीँ , कोई आशा भी नहीँ ये भक्ति है l मुझे भजन करना न पड़े , भजन होने लगे . . .

          तुलसीदास जी ने कहाँ था : -
पयसम वारि निकाय देखी , प्रीत की रीत अस l
विलग होये रस जाये , कपट खटाई परत l l

अर्थात दुध और पानी मे घनिस्ठ मित्रता है , कोई की अपना रुप दूसरे को दे देता है , लेकिन कपट की एक बूँद खटाई पड़ जाने पर दुध और पानी अलग हो जाता है l

रामायण क्या है : -
तुलसीदास जी ने कहाँ है की : - रामायण सत कोटि अपारा l यह ग्रंथ कोई किताब नहीँ , अगर किताब होती तो आज बड़े बड़े यूनिवर्सिटी मे पढ़ाई जाती l इसके लिये इतना समय नहीँ लगाया जाता l धन दौलत नहीँ खर्च किया जाता l ये जीवन है रामायण भागवत ये हमारा जीवन है ! रामायण और भगवदगीता को जानने के लिये सबसे पहले राम और कृष्ण को जानना ज़रूरी है . . . l

ईश्वर कौन है : -
राजा ने एक संत से तीन प्रश्न पूछा , ईश्वर कहाँ रहता है , कैसे मिलता है , कैसे दिखता है , और क्या करता है l
संत बोला - आपको बोल कर नहीँ आपको  प्रेक्टिकली दिखाकर बताता हूँ ! पहले दुध लेकर आईये l राजा दुध लेकर आया , संत बोला इस दुध मे घी कहाँ है दिखाई दे रहा है l राजा बोला नहीँ l भले ही इस दुध मे घी नहीँ दिखाई दे रहा लेकिन दुध मे ही घी है , वैसे ही,  ईश्वर कहाँ है,  सारे जगत मे ही ईश्वर व्याप्त है , जैसे दुध मे घी वैसे जगत मे जगदीश है l

(2) अब ईश्वर मिलता कैसे है , संत बोला अब मंथनी मंगाई जाय , दुध को मथने पर जैसे माखन से घी प्राप्त होता है वैसे ही इस जगत का मंथन किया जाये तो ईश्वर मिलता है , l
हरी व्यापक सर्वत्र सामाना , प्रेम ते प्रगटे यही मै जाना ! प्रेम से मंथन किया जाये तो स्वम प्रगट हो जायेंगा l राजा बोला अब तीसरे प्रश्न का उत्तर बताईये ,

(3)ओ करता क्या है , संत बोला तीसरे प्रश्न का उत्तर चाहिये तो हमको गुरु बनाना पढ़ेंगा , ठीक है , संत बोला ऐसे नहीँ जो गुरु होता है ओ ऊपर बैठता है ऊँचे सिंहासन पर , राजा संत को ऊँचे सिंहासन पर बैठाकर स्वम  नीचे सिंहासन पर बैठ गया तब संत बोला - देखा राजन ईश्वर यही करता है पाँच मिनट मे राजा को रंक और रंक को राजा बनाने का काम l 

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               |||||||| "ये ही सत्य हैं" |||||

Qus→   जीवन का उद्देश्य क्या है ?
Ans→  जीवन का उद्देश्य उसी चेतना को जानना है - जो जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है। उसे जानना ही मोक्ष है..!!

Qus→  जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त कौन है ? 
Ans→  जिसने स्वयं को, उस आत्मा को जान लिया - वह जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है..!!

Qus→  संसार में दुःख क्यों है ?
Ans→  लालच, स्वार्थ और भय ही संसार के दुःख का मुख्य कारण हैं..!!

Qus→  ईश्वर ने दुःख की रचना क्यों की ?
Ans→  ईश्वर ने संसारकी रचना की और मनुष्य ने अपने विचार और कर्मों से दुःख और सुख की रचना की..!!

Qus→  क्या ईश्वर है ? कौन है वे ? क्या रुप है उनका ? क्या वह स्त्री है या पुरुष ?
 Ans→   कारण के बिना कार्य नहीं। यह संसार उस कारण के अस्तित्व का प्रमाण है। तुम हो, इसलिए वे भी है - उस महान कारण को ही आध्यात्म में 'ईश्वर' कहा गया है। वह न स्त्री है और ना ही पुरुष..!!

Qus→   भाग्य क्या है ?
Ans→  हर क्रिया, हर कार्य का एक परिणाम है। परिणाम अच्छा भी हो सकता है, बुरा भी हो सकता है। यह परिणाम ही भाग्य है तथा आज का प्रयत्न ही कल का भाग्य है..!!

Qus→   इस जगत में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है ? 
Ans→   रोज़ हजारों-लाखों लोग मरते हैं और उसे सभी देखते भी हैं, फिर भी सभी को अनंत-काल तक जीते रहने की इच्छा होती है..इससे बड़ा आश्चर्य ओर क्या हो सकता है..!!

Qus→   किस चीज को गंवाकर मनुष्यधनी बनता है ?
Ans→   लोभ..!!

Qus→   कौन सा एकमात्र उपाय है जिससे जीवन सुखी हो जाता है? 
Ans →   अच्छा स्वभाव ही सुखी होने का उपाय है..!!

Qus →   किस चीज़ के खो जानेपर दुःख नहीं होता ?
Ans →   क्रोध..!!

Qus→   धर्म से बढ़कर संसार में और क्या है ?
Ans →   दया..!!

Qus→   क्या चीज़ दुसरो को नहीं देनी चाहिए ?
Ans→   तकलीफें, धोखा..!!

Qus→   क्या चीज़ है, जो दूसरों से कभी भी नहीं लेनी चाहिए ?
Ans→   इज़्ज़त, किसी की हाय..!! 

Qus→   ऐसी चीज़ जो जीवों से सब कुछ करवा सकती है?
Ans→   मज़बूरी..!!

Qus→   दुनियां की अपराजित चीज़ ?
Ans→  सत्य..!!

Qus→ दुनियां में सबसे ज़्यादा बिकने वाली चीज़ ? Ans→   झूठ..!!

Qus→   करने लायक सुकून काकार्य ?
Ans→ परोपकार..!!

Qus→   दुनियां की सबसे बुरी लत ?
Ans→ मोह..!!

Qus→   दुनियां का स्वर्णिम स्वप्न ?
Ans→   जिंदगी..!!

Qus→   दुनियां की अपरिवर्तनशील चीज़ ?
Ans→   मौत..!!

Qus→   ऐसी चीज़ जो स्वयं के भी समझ ना आये ?
Ans→   अपनी मूर्खता..!!

Qus→   दुनियां में कभी भी नष्ट/ नश्वर न होने वाली चीज़ ?
Ans→   आत्मा और ज्ञान..!!

Qus→   कभी न थमने वाली चीज़ ?
Ans→   समय..

संपादक -   उमाशंकर साहू
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