शुक्रवार, 6 मई 2016

राधा साध्यं, साधनं यस्य राधा


राधा साध्यं, साधनं यस्य राधा | मन्त्रो राधा, मन्त्रदात्री च राधा | सर्वं राधा, जीवनं यस्य राधा | राधा राधा वाचितां यस्य शेषं | भूमि तत्व जल तत्व अग्नि तत्व पवन तत्व, ब्रह्म तत्व व्योम तत्व विष्णु तत्व भोरी है। सनकादिक सिद्ध तत्व आनंद प्रसिद्ध तत्व, नारद सुरेश तत्व शिव तत्व गोरी है ॥ प्रेमी कहे नाग किन्नरका तत्व देख्यो, शेष और महेश तत्व नेति-नेति जोरी है । तत्वन के तत्व जग जीवन श्रीकृष्ण चन्द्र, कृष्ण हू को तत्व वृषभानु की किशोरी है। हे राधे करुणामयी शुललिते हे कृष्ण चिंतामणि हे श्री रास रसेश्वरी शुविमले वृन्दावनाधिश्वरि | कान्ते कांति प्रदायनी मधुमयी मोदप्रदे माधवी भक्तानंद समस्तसाख्य सरिते श्री राधिके पातु मां || “राधे तू बड़भागिनी , कौन तपस्या कीन्ह । तीन लोक तारन तरन , सो तेरे आधीन ॥
श्री राधा नाम की महिमा का स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने इस प्रकार गान किया है-“जिस समय मैं किसी के मुख से ’रा’ अक्षर सुन लेता हूँ, उसी समय उसे अपना उत्तम भक्ति-प्रेम प्रदान कर देता हूँ और ’धा’ शब्द का उच्चारण करने पर तो मैं प्रियतमा श्री राधा का नाम सुनने के लोभ से उसके पीछे-पीछे दौड़(धावति) लगा देता हूँ” ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

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