शुक्रवार, 6 मई 2016

प्रभु से प्रार्थना

प्रभु से प्रार्थना

हे परमात्मा,
अगर आप का कुछ तोड़ने का मन करे तो,
मेरा ग़रूर तोड़ देना..
अगर आप का कुछ जलाने का मन करे,
तो मेरा क्रोध जला देना..
अगर आप का कुछ बुझाने का मन करे,
तो मेरी घृणा बुझा देना..
अगर आप का मारने का मन करे,
तो मेरी इच्छाओं को मार देना..
अगर आप का प्यार करने का मन करे,
तो मेरी ओर देख लेना..
"मैं शब्द, तुम अर्थ, तुम बिन मैं व्यर्थ" ......

प्रभु कहते है....!!
होती आरती, बजते शंख,
पूजा में सब खोए है,
मंदिर के बाहर तो देखो,
भूखे बच्चे सोए है |
एक निवाला इनको देना,
प्रसाद मुझे चढ जायेगा,
मेरे दर पर माँगने वाले,
तुझे बिन माँगे सब मिल जायेगा !

एक बार एक सज्जन ने
किसी सत्संगी से पूछा कि ,
तुमने पूरी जिंदगी सत्संग में गुजार दी,
तुमने ऐसा क्या पाया,
सत्संगी ने मुस्कराते हुए कहा,
कि मैने क्या पाया ये तो,
मेरा सतगुरु मुझसे बेहतर जानता है।
पर हा मैने जरूर कुछ खोया है।
वो है मेरा क्रोध
मेरा घमंड
मेरी लालच
मेरी उदासी
.और मौत का डर.......
    

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