जय श्री राधे
1) एक लडकी थी जो कृष्ण
जी की अनन्य भक्त थी!!
बचपन से ही कृष्ण भगवान का भजन
करती थी,
भक्ति करती थी, भक्ति करते-करते
बड़ी हो गई, भगवान की कृपासे
उसका विवाह भी श्रीधाम वृंदावन में
किसी अच्छे घर में हो गया. विवाह होकर
पहली बार वृंदावन गई, पर नई दुल्हन होने से
कही जा न सकी, और मायके चलि गई. और
वो दिन भी आया जब उसका पति उसे लेने उसके मायके
आया, अपने पति के साथ फिर वृंदावन पहुँच गई, पहुँचते पहुँचते
उसे शाम हो गई,
पति वृंदावन में यमुना किनारे रूककर कहने लगा --- देखो! शाम
का समय है में यमुना जी मे स्नान करके
अभी आता हूँ, तुम इस पेड़ के नीचे बैठ
जाओ और सामान की देखरेख करना मै थोड़े
ही समय में आ जाऊँगा यही सामने
ही हूँ, कुछ लगे तो मुझे आवाज दे देना, इतना कहकर
पति चला गया और वह लडकी बैठ गई. अब एक हाथ
लंबा घूँघट निकाल रखा है, क्योकि गाँव है,ससुराल है और
वही बैठ गई,
मन ही मन विचार करने लगी - कि देखो!
ठाकुर जी की कितनी कृपाहै
उन्हें मैंने बचपन से भजा और उनकी कृपा से
मेरा विवाह भी श्री धाम वृंदावन में हो गया.
मैं इतने वर्षों से ठाकुर जी को मानती हूँ
परन्तु अब तक उनसेकोई रिश्ता नहीं जोड़ा? फिर
सोचती है ठाकुर जी की उम्र
क्या होगी ?
लगभग १६ वर्ष के होंगे, मेरे पति २० वर्ष केहै उनसे थोड़े से छोटे
है, इसलिए मेरे पति के छोटे भाई की तरह हुए, और
मेरे देवर की तरह, तो आज से ठाकुर
जी मेरे देवर हुए, अब तो ठाकुर जी से
नया सम्बन्ध जोड़कर बड़ी प्रसन्न हुई और मन
ही मन ठाकुर जी से कहने
लगी - देखो ठाकुर जी ! आज से मै
तुम्हारी भाभी और तुम मेरे देवर हो गए,
अब वो समय आएगा जब तुम मुझे भाभी-
भाभी कहकर पुकारोगे.
इतना सोच
ही रही थी तभी एक
१०- १५ वर्ष का बालक आया और उस लडकी से बोला -
भाभी-भाभी ! लडकी अचानक
अपने भाव से बाहर आई और सोचने लगी वृंदावन में
तो मै नई हूँ ये भाभी कहकर कौन बुला रहा है, नई
थी इसलिए घूँघट उठकर नहीं देखा कि गाँव
के किसी बड़े-बूढ़े ने देख
लिया तो बड़ी बदनामी होगी. अब
वह बालक बार-बार कहता पर वह उत्तर न
देती बालक पास आया और बोला - भाभी! नेक
अपना चेहरा तो देखाय दे, अब वह सोचने लगी अरे ये
बालक तो बड़ी जिद कर रहा है इसलिए कस के घूँघट
पकड़कर बैठ गई कि कही घूँघट उठकर देखन ले,
लेकिन उस बालक ने जबरजस्ती घूँघट उठकर
चेहरा देखा और भाग गया. थोड़ी देर में उसका पति आ
गया, उसनेसारी बात अपने पतिसे कही.
पति नेकहा - तुमने मुझे आवाज
क्यों नहीं दी ?
लड़की बोली - वह तो इतनेमें भाग
ही गया था. पति बोला - चिंता मत करो, वृंदावन बहुत
बड़ा थोड़े ही है ,
कभी किसी गली में खेलता मिल
गया तो हड्डी पसली एक कर दूँगा फिर
कभी ऐसा नहीं कर सकेगा. तुम्हे
जहाँ भी दिखे, मुझे जरुर बताना. फिर दोनों घर गए,
कुछ दिन बाद उसकी सास नेअपने बेटे से कहा- बेटा!
देख तेरा विवाह हो गया, बहू मायके से भी आ गई, पर
तुम दोनों अभी तक बाँके
बिहारी जी केदर्शन के लिए
नहीं गए कल जाकर बहू को दर्शन कराकर लाना. अब
अगले दिन दोनों पति पत्नी ठाकुर जी के
दर्शन के लिए मंदिर जाते है मंदिर में बहुत भीड़
थी, लड़का कहने लगा - देखो! तुम स्त्रियों के साथ आगे
जाकर दर्शन करो, में भी आता हूँ अब वह आगे गई
पर घूंघट नहीं उठाती उसे डर लगता कोई
बड़ा बुढा देखेगा तो कहेगा नई बहू घूँघट के बिना घूम
रही है. बहूत देर हो गई पीछे से पति ने
आकर कहा - अरी बाबली !
बिहारी जी सामनेहै, घूँघट काहे नाय
खोले,घूँघट नाय खोलेगी तो दर्शन कैसे करेगी,
अब उसने अपना घूँघट उठाया और जो बाँके
बिहारी जी की ओर देखातो बाँके
बिहारी जी कि जगह
वही बालक मुस्कुराता हुआ दिखा तो एकदम से चिल्लाने
लगी - सुनिये जल्दी आओ!
जल्दी आओ !
पति पीछेसे भागा- भागा आया बोला क्या हुआ?
लड़की बोली - उस दिन जो मुझे
भाभी-भाभी कहकर भागा था वह बालक मिल
गया. पति ने कहा - कहाँ है ,अभी उसे देखता हूँ ?
तो ठाकुर जी की ओर इशारा करके
बोली- ये रहा, आपके सामनेही तो है,
उसके पति ने जो देखा तो अवाक रह गया और वही मंदिर
में ही अपनी पत्नी के चरणों में
गिर पड़ा बोला तुम धन्य हो वास्तव में तुम्हारे ह्रदय में सच्चा भाव
ठाकुर जी के प्रति है, मै इतने वर्षों से वृंदावन मै हूँ
मुझे आज तक उनके दर्शन नहीं हुए और तेरा भाव
इतना उच्च है कि बिहारी जी के तुझे
दर्शन हुए.. .....
बोल श्री बांके बिहारी
(2) राधा रानी की शक्ति
गोवर्धन लीला के बाद समस्त ब्रजमंडल के कृष्ण के नाम की चर्चा होने लगी, सभी ब्रजवासी कृष्ण की जय-जयकार कर रहे थे और उनकी महिमा का गान कर रहे थे। ब्रज के गोप-गोपियों के मध्य कृष्ण की ही चर्चा थी। एक स्थान पर कुछ गोप और गोपियाँ एकत्रित थी और यही चर्चा चल रही थी तभी एक गोप मधुमंगल बोला इसमें कृष्ण की क्या विशेषता है, यह कार्य तो हम लोग भी कर सकते है।
वहां राधा रानी की सखी ललीता भी उपस्थित थी वह तुरंत बोल उठी "हां हां देखी है तुम्हारी योग्यता, जब कृष्ण ने पर्वत उठाया था तो तुम सभी ने अपनी-अपनी लाठियां पर्वत के नीचे लगा थी और कान्हा से हाथ हठा लेने के लिए कहा था, हाथ हठाना तो दूर कान्हा ने थोड़ी से अंगुली टेढ़ी की और तुम सब की लाठियां चटाचट टूट गई थी, तब तुम सब मिलकर यही यही बोले थे कान्हा तुम्ही संभालो, तब कान्हा ने ही पर्वत संभाला था"
यह सुनकर मधुमंगल बोला "हाँ हाँ मान लिया की कान्हा ने ही संभाला, किन्तु हम ने प्रयास तो किया तुमने क्या किया "
यह सुनकर ललीता बोली " हां हां देखी है तुम्हारे कान्हा की भी शक्ति, माना हमने कुछ नहीं किया किन्तु हमारी सखी राधारानी ने तो किया"
मधुमंगल बोला "अच्छा जी राधा रानी ने क्या करा तनिक यह तो बताओ"
ललीता ने उत्तर दिया "पर्वत तो हमारी राधारानी ने ही उठाया था, कृष्ण का तो बस नाम हो गया"
यह सुनकर सभी गोप सखा हंसने लगे और बोले "लो जी अब यह राधा रानी कहाँ से आ गई, पर्वत उठाया कान्हा ने, हाथ दुखे कान्हा के, पूरे सात दिन एक स्थान पर खड़े रहे कान्हा, ना भूंख की चिंता ना प्यास की, ना थकान का कोई भाव, ना कोई दर्द, सब कुछ किया कान्हा ने और बीच में आ गई राधारानी"
तब ललीता बोली लगता है जिस समय कान्हा ने पर्वत उठाया था उस समय तुम लोग कही और थे, अन्यथा तुमको भी पता चल जाता कि पर्वत तो हमारी राधारानी ने ही उठाया था"
या सुनकर सभी गोपसखा बोले "ऐसी प्रलयकारी स्थिति में कही और जा कर हमको क्या मरना था, एक कृष्ण ही तो हम सबका आश्रय थे, जिन्होंने सबके प्राणों की रक्षा की"
ललीता बोली "तब भी तुमको यह नहीं पता चला कि पर्वत हमारी राधारानी ने उठाया था"
सभी गोपसखा बोले "हमने तो ऐसा कुछ भी नहीं देखा"
तब ललीता बोली "अच्छा यह बताओ कि कान्हा ने पर्वत किस हाथ से उठाया था"
मधुमंगल बोला "कान्हा ने तो पर्वत अपने बायें हाथ से ही उठा दिया था, दायें हाथ की तो आवश्यकता ही नहीं पड़ी"
तब ललीता बोली "तभी तो में कहती हूँ की पर्वत हमारी राधारानी ने उठाया, कृष्ण ने नहीं, यदि कृष्ण अपनी शक्ति से पर्वत उठाते तो वह दायें हाथ से उठाते किन्तु उन्होंने पर्वत बायें हाथ से उठाया, क्योकि किसी भी पुरुष का दायां भाग उसका स्वयं का तथा बायाँ भाग स्त्री का प्रतीक होता है, जब कान्हा ने पर्वत उठाया तब उन्होंने श्री राधारानी का स्मरण किया और तब पर्वत उठाया, इसी कारण उन्होंने पर्वत बाएं हाथ से उठाया, कृष्ण के स्मरण करने पर श्री राधा रानी ने उनकी शक्ति बन कर पर्वत को धारण किया।" अब किसी भी बालगोपाल के पास ललीता के इस तर्क का कोई उत्तर नहीं था, सभी निरुत्तर हो गए और ललीता राधे-राधे गुनगुनाती वहां से चली गई।
यह सत्य है कि राधे रानी ही भगवान श्री कृष्ण की आद्यशक्ति है, जब भी भगवान कृष्ण ने कोई विशेष कार्य किया पहले अपनी शक्ति का स्मरण किया, श्री राधा रानी कृष्ण की शक्ति के रूप में सदा कृष्ण के साथ रही, इसलिए कहा जाता है, कि श्री कृष्ण को प्राप्त करना है तो श्रीराधा रानी को प्रसन्न करना चाहिए। जहाँ राधा रानी होंगी वहां श्री कृष्ण स्वयं ही चले आते हैं। यही कारण है कि भक्त लोग कृष्ण से पहले राधा का नाम लेते है। जय हो मेरी राधा रानी
बोलिये वृन्दावन बिहारी लाल की जय ।
जय जय श्री राधे।
श्री राधा- कृष्ण की कृपा से आपका दिन मंगलमय हो ।
श्री कृष्ण शरणम मम:::!!!:::
(3) श्री राधा रानी जी के बरसाना की 'सुंदर कथा'
सांकरी गली एक ऐसी गली है जिससे एक - एक गोपी ही निकल सकती है और उस समय उनसे श्याम सुंदर दान लेते हैं | सांकरी खोर पर सामूहिक दान होता है | श्याम सुन्दर के साथ ग्वाल बाल भी आते हैं | कभी तो वे दही लूटते हैं, कभी वे दही मांगते हैं, और कभी वे दही के लिए प्रार्थना करते हैं | यहाँ जो ये राधा रानी का पहाड़ है वो गोरा है | सामने वाला पहाड़ श्याम सुंदर का है और वो शिला कुछ काली है | काले के बैठने से पहाड़ काला हो गया और गोरी के बैठने से कुछ गोरा हो गया | पहले राधा रानी की छतरी है फिर श्याम सुंदर की छतरी है और नीचे मन्सुखा की छतरी है | यहाँ दान लीला होती है | यहाँ नन्दगाँव वाले दही लेने आये थे एकादशी में तो सखियों ने पकड़कर उनकी चोटी बांध दी थी | श्याम सुंदर की चोटी ऊपर बाँध देती हैं और मन्सुखा की चोटी नीचे बांध देती हैं | मन्सुखा चिल्लाता है कि हे कन्हैया इन बरसाने की सखियों ने हमारी चोटी बांध दी हैं |जल्दी से आकर के छुड़ा भई , तो श्याम सुंदर बोलते हैं कि अरे ससुर मैं कहाँ से छुड़ाऊं | मेरी भी चोटी बंधी पड़ी है | सखियाँ दोनों के साथ-साथ सब की चोटी बाँध देती हैं | और फिर सखियाँ कहती हैं कि चोटी ऐसे नहीं खुलेगी | राधा रानी की शरण में जाओ तब तुम्हारी चोटी खुलेगी | सब श्री जी की शरण में जाते हैं और प्रार्थना करते हैं | तब श्री जी की आज्ञा से सब की चोटी खुलती हैं | श्री जी कहती हैं कि इनकी चोटी खोल दो | श्याम सुंदर प्यारे को इतना कष्ट क्यों दे रही हो ? गोपी बोली कि ये चोटी बंधने के ही लायक हैं | ये लीला यहाँ राधाष्टमी के तीन दिन बाद होती है ! ! ! ! ! ! ! ! ! !
Radhy radhy jo jape aanant koti sukh paye
जवाब देंहटाएंRadhyshyam hi mere maa bap hai
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